NEET Paper Leak: राष्ट्रीय पात्रता सह प्रवेश परीक्षा (NEET) से जुड़े कथित प्रश्नपत्र लीक मामले में जांच का दायरा लगातार बढ़ता जा रहा है। इसी क्रम में दिल्ली की एक विशेष अदालत ने मामले की आरोपी मनीषा वाघमारे को फिलहाल कोई राहत देने से इनकार कर दिया है। अदालत ने उनकी जमानत याचिका खारिज करते हुए जांच एजेंसी की आपत्तियों को गंभीरता से लिया।
यह मामला देश की सबसे महत्वपूर्ण मेडिकल प्रवेश परीक्षाओं में से एक NEET की निष्पक्षता से जुड़ा होने के कारण राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा का विषय बना हुआ है। जांच एजेंसियां परीक्षा प्रक्रिया में कथित अनियमितताओं और नेटवर्क की भूमिका की पड़ताल कर रही हैं।
बचाव पक्ष ने पेश किए अपने तर्क
सुनवाई के दौरान आरोपी पक्ष ने अदालत को बताया कि मनीषा वाघमारे शिक्षा क्षेत्र से जुड़ी पेशेवर काउंसलर हैं और उनकी आय का नियमित स्रोत मौजूद है। बचाव पक्ष ने वित्तीय लेनदेन से जुड़े आरोपों को भी खारिज करते हुए कहा कि संबंधित धनराशि पारिवारिक संपत्ति से जुड़े वैध दस्तावेजों के माध्यम से प्राप्त हुई थी।
वकीलों ने यह भी दलील दी कि जांच के दौरान की गई तलाशी में कोई आपत्तिजनक नकदी या ऐसा प्रत्यक्ष साक्ष्य बरामद नहीं हुआ, जिससे उनकी मुवक्किल की भूमिका साबित हो सके।
जांच एजेंसी ने लगाए गंभीर आरोप
दूसरी ओर केंद्रीय जांच एजेंसी ने अदालत में दावा किया कि आरोपी की भूमिका केवल शैक्षणिक परामर्श तक सीमित नहीं थी। एजेंसी के अनुसार, जांच के दौरान ऐसे साक्ष्य और बयान सामने आए हैं जो परीक्षा से जुड़े संवेदनशील प्रश्नों के कथित आदान-प्रदान की ओर संकेत करते हैं।
जांच एजेंसी का कहना है कि कुछ अभ्यर्थियों और अन्य संबंधित व्यक्तियों के बयान इस मामले में महत्वपूर्ण कड़ी साबित हो सकते हैं। इसी आधार पर एजेंसी ने अदालत से जमानत न देने का अनुरोध किया।
दूसरे आरोपी की अंतरिम जमानत पर सुनवाई जारी
मामले में एक अन्य आरोपी यश यादव ने भी अदालत का दरवाजा खटखटाया है। उन्होंने पारिवारिक कारणों और आगामी शैक्षणिक गतिविधियों का हवाला देते हुए सीमित अवधि के लिए अंतरिम जमानत की मांग की है।
अदालत ने इस याचिका पर जांच एजेंसी से जवाब मांगा है। मामले की अगली सुनवाई निर्धारित तिथि पर होगी, जहां दोनों पक्षों की दलीलों के बाद अंतरिम राहत पर फैसला सामने आ सकता है।
राष्ट्रीय परीक्षा प्रणाली पर बनी हुई है नजर
NEET परीक्षा देशभर में मेडिकल शिक्षा में प्रवेश का प्रमुख माध्यम है। ऐसे में पेपर लीक और परीक्षा सुरक्षा से जुड़े आरोपों ने अभ्यर्थियों, अभिभावकों और शिक्षा विशेषज्ञों की चिंताएं बढ़ा दी हैं।
नई दिल्ली में चल रही न्यायिक कार्यवाही और केंद्रीय जांच एजेंसी की जांच पर पूरे देश की नजर बनी हुई है। आने वाले दिनों में अदालतों के फैसले और जांच की प्रगति इस मामले की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
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फिलहाल मनीषा वाघमारे को जमानत नहीं मिली है, जबकि दूसरे आरोपी की अंतरिम जमानत याचिका पर सुनवाई जारी है। जांच एजेंसियां मामले से जुड़े वित्तीय लेनदेन, संपर्कों और कथित प्रश्नपत्र वितरण नेटवर्क की जांच कर रही हैं। शिक्षा जगत और लाखों छात्रों के लिए यह मामला परीक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और विश्वसनीयता से जुड़ा अहम विषय बना हुआ है।







