Biren Singh Audio Tape Investigation: आज भारत के सर्वोच्च न्यायालय ने मणिपुर के पूर्व मुख्यमंत्री एन. बिरेन सिंह से जुड़े कथित ऑडियो टेप्स की फॉरेंसिक जांच रिपोर्ट में अत्यधिक देरी पर कड़ी नाराज़गी जताई। यह मामला मई 2023 में राज्य में भड़की जातीय हिंसा से जुड़ा है और इसमें गंभीर आरोपों की वजह से देशभर में चिंता और बहस छिड़ी हुई है।
सरकार की ओर से पेश सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने मुख्य न्यायाधीश संजीव खन्ना और न्यायमूर्ति संजय कुमार की पीठ को बताया कि सेंट्रल फॉरेंसिक साइंस लेबोरेटरी (CFSL) की रिपोर्ट अभी भी लंबित है और इसके पीछे अस्पष्ट तकनीकी कारण बताए गए हैं, जबकि कोर्ट ने दो महीने पहले ही रिपोर्ट के लिए निर्देश दिया था।
मुख्य न्यायाधीश ने टिप्पणी की
फॉरेंसिक रिपोर्ट का क्या हुआ? अब तक तो वह आ जानी चाहिए थी। आदेश मई 2025 में दिया गया था। तीन महीने हो चुके हैं। अब तक तो प्रयोगशाला को आपको रिपोर्ट दे देनी चाहिए थी। कम से कम हमें बताइए कि रिपोर्ट आई है या अभी भी पाइपलाइन में है।
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जब सरकारी वकील ने जवाब दिया कि रिपोर्ट नहीं आई है, तब न्यायमूर्ति संजय कुमार ने कहा, ‘एक आवाज की जांच में एफएसएल को कितना समय लगता है? यह अनिश्चित काल तक नहीं चल सकता। हम इसे अंतिम बार दो सप्ताह की मोहलत देते हैं।’
अब अगली सुनवाई 19 अगस्त 2025 को होगी। लेकिन कोर्ट ने साफ संकेत दे दिया कि बार-बार की देरी और गंभीर मामले में सुस्ती न्याय व्यवस्था और जनविश्वास को कमजोर कर रही है।
‘ट्रुथ लैब्स’ बनाम CFSL
इस मामले में एक निजी फॉरेंसिक एजेंसी ट्रुथ लैब्स ने सिर्फ 15 दिनों में रिपोर्ट सौंप दी थी, जिसमें 93% संभावना जताई गई कि टेप में आवाज बिरेन सिंह की ही है। वहीं दूसरी ओर, गृह मंत्रालय के अधीन काम करने वाली केंद्रीय एजेंसी CFSL अभी तक कोई ठोस नतीजा नहीं दे सकी है।
सरकार ने ट्रुथ लैब्स की रिपोर्ट को यह कहकर खारिज कर दिया था कि वह एक निजी संस्था है और सिर्फ CFSL की रिपोर्ट ही मान्य होगी। लेकिन अब CFSL की निष्क्रियता पर सवाल उठने लगे हैं।
याचिकाकर्ता संगठन KOHUR (कुकी संगठन फॉर ह्यूमन राइट्स ट्रस्ट) की ओर से वकील प्रशांत भूषण ने इस देरी की कड़ी आलोचना करते हुए कहा, ‘ट्रुथ लैब्स ने दो हफ्तों में रिपोर्ट दी, तो CFSL क्यों महीनों से रिपोर्ट नहीं दे पा रहा है, जबकि उसके पास कहीं ज़्यादा संसाधन हैं? यह देरी संदेहास्पद और अन्यायपूर्ण है।’
विस्फोटक आरोप और जन आक्रोश
KOHUR द्वारा दायर याचिका में एक ऑडियो रिकॉर्डिंग का उल्लेख किया गया है, जिसमें कथित तौर पर बिरेन सिंह एक बंद कमरे की बैठक में यह स्वीकार करते सुने जा रहे हैं कि उन्होंने जातीय हिंसा को बढ़ावा दिया और मेइती समूहों को शस्त्रागार लूटने व गिरफ्तारी से बचने की छूट दी।
बढ़ते दबाव के चलते सिंह ने 9 फरवरी 2025 को इस्तीफा दे दिया था। हालांकि, राज्य और केंद्र सरकार ने इन टेप्स को फर्जी और षड्यंत्र का हिस्सा बताया।
नवंबर 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने टेप की प्रमाणिकता जांचने का आदेश दिया था, जिसके बाद ट्रुथ लैब्स ने पुष्टि की कि टेप में आवाज संभवतः सिंह की है। लेकिन केंद्र सरकार ने इसे स्वीकार नहीं किया और CFSL से अंतिम रिपोर्ट मांगी थी, जिसकी समयसीमा 24 मार्च 2025 तय की गई थी।
मई 2025 में आई पहली रिपोर्ट को अदालत ने असंपूर्ण बताते हुए नकार दिया और दोबारा पूरी जांच के आदेश दिए — जिसकी रिपोर्ट आज तक नहीं आई।
जन आक्रोश और राजनीतिक ध्रुवीकरण
सोशल मीडिया पर खासकर X (पूर्व में ट्विटर) पर लोग खुलकर अपनी नाराज़गी जता रहे हैं। कुकी-जो समुदाय के लोग इसे सत्ता को बचाने की चाल कह रहे हैं, वहीं कई मेइती समूह इसे राजनीतिक साजिश बता रहे हैं।
मुख्य न्यायाधीश खन्ना ने दो टूक कहा, ‘हम तकनीकी समस्याओं को समझते हैं, लेकिन यह प्रक्रिया अनिश्चितकाल तक नहीं चल सकती। इसमें जवाबदेही होनी चाहिए।’
यदि CFSL यह पुष्टि करता है कि टेप असली हैं, तो बिरेन सिंह के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चल सकता है और मणिपुर में राजनीतिक भूचाल आ सकता है। दूसरी ओर, यदि टेप फर्जी करार दिए जाते हैं, तो सरकार की यह दलील मजबूत होगी कि यह एक राजनीतिक साजिश थी।
प्रशांत भूषण ने अदालत में कहा, ‘जब बात बड़े पैमाने पर हिंसा और राजनीतिक मिलीभगत की हो, तो न्याय में देरी, न्याय से इनकार के समान है।’









