उत्तराखंड सरकार ने गन्ना किसानों को बड़ी राहत देते हुए पेराई सत्र 2025–26 के लिए गन्ने के राज्य परामर्शित मूल्य (SAP) को मंजूरी दे दी है। मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी की अध्यक्षता में हुई राज्य मंत्रिमंडल की बैठक में यह अहम निर्णय लिया गया। इसके तहत अगेती प्रजाति के गन्ने का मूल्य 405 रुपये प्रति क्विंटल और सामान्य प्रजाति का मूल्य 395 रुपये प्रति क्विंटल निर्धारित किया गया है। ये दरें चीनी मिलों के गेट पर लागू होंगी।
किसानों और मिलों के हितों में संतुलन
सरकार ने स्पष्ट किया है कि गन्ना मूल्य तय करते समय किसानों और चीनी मिलों—दोनों के हितों को ध्यान में रखा गया है। राज्य परामर्शी समिति की सिफारिशों पर मुख्यमंत्री की स्वीकृति के बाद इन दरों को अंतिम रूप दिया गया। सरकार का मानना है कि इससे पेराई सत्र के दौरान किसी तरह का असंतुलन पैदा नहीं होगा और व्यवस्था सुचारु रूप से चलेगी।
भुगतान व्यवस्था पर भी ध्यान
कैबिनेट बैठक में यह भी फैसला किया गया कि बाहरी क्रय केंद्रों से चीनी मिलों तक गन्ने के परिवहन पर आने वाले खर्च के बदले 11 रुपये प्रति क्विंटल की कटौती की जाएगी। वहीं, गन्ना विकास अंशदान (कमीशन) की दर को पिछले सत्र की तरह 5.50 रुपये प्रति क्विंटल पर ही बनाए रखा गया है। सरकार का दावा है कि इस व्यवस्था से किसानों पर अतिरिक्त आर्थिक दबाव नहीं पड़ेगा और उन्हें समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा।
बिजली और बुनियादी ढांचे से जुड़े अहम निर्णय
गन्ना मूल्य निर्धारण के अलावा मंत्रिमंडल ने बिजली क्षेत्र से जुड़े प्रस्तावों पर भी मुहर लगाई। उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीसीएल) का वार्षिक वित्तीय प्रतिवेदन विधानसभा में प्रस्तुत किए जाने को मंजूरी दी गई, जिससे ऊर्जा क्षेत्र की वित्तीय स्थिति और कार्यप्रणाली की समीक्षा हो सकेगी।
इसके साथ ही राज्य सरकार ने ब्रिडकुल (ब्रिज, रोपवे, टनल एवं अन्य अवसंरचना निर्माण निगम) के कार्यक्षेत्र का विस्तार करने का निर्णय लिया है। अब ब्रिडकुल पुलों के साथ-साथ रोपवे, पार्किंग और टनल निर्माण जैसी परियोजनाओं को भी अंजाम देगा। सरकार का मानना है कि इससे राज्य में बुनियादी ढांचे के विकास को नई गति मिलेगी और परियोजनाएं तेजी से पूरी हो सकेंगी।
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विकास और किसान हितों पर फोकस
कुल मिलाकर, राज्य मंत्रिमंडल के ये फैसले गन्ना किसानों को आर्थिक संबल देने के साथ-साथ उत्तराखंड के बिजली और इंफ्रास्ट्रक्चर सेक्टर को मजबूत करने की दिशा में अहम माने जा रहे हैं। सरकार ने संकेत दिए हैं कि आने वाले समय में भी किसान हित और विकास से जुड़े फैसलों को प्राथमिकता दी जाएगी।









