Radhika Yadav Murder: गुरुवार को गुरुग्राम से एक ऐसी खबर आई जिसने सबको हैरान कर दिया। गुरुग्राम में गुरुवार को 25 वर्षीय राज्य स्तरीय टेनिस खिलाड़ी राधिका यादव की उनके ही पिता ने गोली मारकर हत्या कर दी।
पुलिस के अनुसार, राधिका यादव को गुरुग्राम के सुषांत लोक-2 के ब्लॉक-G स्थित उनके तीन मंजिला घर में सुबह करीब 10:30 बजे रसोई में खाना बनाते समय तीन गोलियां पीठ में मारी गईं। बताया जा रहा है कि, राधिका अपनी खुद की टेनिस अकादमी चलाती थीं, गोली लगते ही उनकी मौके पर ही मौत हो गई, क्योंकि गोलियां उनके अहम अंगों को चीरती हुई लगी थीं।
आरोपी पिता दीपक यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है, और उनके पास से लाइसेंसी रिवॉल्वर जब्त की गई है।
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टेनिस अकादमी को लेकर था विवाद
पुलिस की प्रारंभिक जांच में सामने आया है कि राधिका के पिता, 51 वर्षीय दीपक यादव, बेटी के खुद की टेनिस अकादमी चलाने से नाराज थे। पुलिस के मुताबिक, गांव वजीराबाद में रहने वाले लोग और जान-पहचान के लोग दीपक यादव का मज़ाक उड़ाते थे कि वह अपनी बेटी की कमाई पर निर्भर हैं।
सदर क्षेत्र के सहायक पुलिस आयुक्त (ACP) यशवंत यादव ने बताया, ‘उन्होंने राधिका से कई बार टेनिस अकादमी बंद करने के लिए कहा था, लेकिन वह तैयार नहीं हुईं। पहले भी इस पर विवाद हो चुका था। आखिरकार उन्होंने इसी झगड़े को लेकर गोली चला दी।’
‘आत्म-सम्मान पर चोट’ को बताया हत्या का कारण
पुलिस के अनुसार, दीपक यादव पिछले 15 दिनों से सामाजिक आलोचना से डिप्रेशन में थे। FIR के अनुसार, उन्होंने अपने बयान में कहा कि वह अपने आत्म-सम्मान पर हुए आघात को अब और सहन नहीं कर पा रहे थे, इसलिए उन्होंने यह कदम उठाया।
एक जांच अधिकारी ने यह भी बताया कि हाल ही में राधिका ने सोशल मीडिया पर एक वीडियो भी पोस्ट किया था। इस वजह से भी राधिका के पिता नाराज थे। हालांकि पुलिस अन्य संभावित कारणों की भी जांच कर रही है।
राधिका यादव कौन थीं?
राधिका एक प्रतिभाशाली और प्रेरणादायक युवा खिलाड़ी थीं। उन्होंने स्कॉटिश हाई इंटरनेशनल स्कूल से पढ़ाई की थी।वर्ष 2018 में कॉमर्स स्ट्रीम से 12वीं पास करने के बाद वह टेनिस में करियर बनाने लगीं। वह इंटरनेशनल टेनिस फेडरेशन (ITF) की रैंकिंग में डबल्स कैटेगरी में 113वें स्थान पर थीं और एक समय शीर्ष 200 खिलाड़ियों में शामिल थीं।
हाल ही में उन्होंने कंधे में चोट के चलते फिजियोथेरेपी शुरू की थी, लेकिन फिर भी वह न केवल अपनी अकादमी चला रही थीं, बल्कि युवा खिलाड़ियों को प्रेरित भी कर रही थीं।
यह घटना समाज में महिला आत्मनिर्भरता के प्रति संकीर्ण सोच और पितृसत्तात्मक मानसिकता को उजागर करती है।
राधिका की मौत न केवल एक होनहार खिलाड़ी का अंत है, बल्कि यह एक पिता की ‘आहत झूठी प्रतिष्ठा’ का खतरनाक उदाहरण भी है।









