एक नए वैज्ञानिक अध्ययन ने कोविड-19 के लंबे असर को लेकर चौंकाने वाली जानकारी उजागर की है। शोध के अनुसार, कोरोना वायरस शरीर की रक्त वाहिकाओं की उम्र को लगभग 5 साल तक बढ़ा सकता है, यानी नसें पहले की तुलना में जल्दी बूढ़ी होने लगती हैं। सबसे चिंताजनक बात यह है कि यह प्रभाव महिलाओं में अधिक देखा गया है।
फेफड़ों से आगे बढ़कर दिल और नसों पर असर
अब यह स्पष्ट होता जा रहा है कि कोविड-19 केवल फेफड़ों को प्रभावित करने वाली बीमारी नहीं है, बल्कि दिल और पूरे सर्कुलेटरी सिस्टम पर इसका गंभीर प्रभाव पड़ता है।
अध्ययन में हल्के संक्रमण वाले मरीजों में भी आर्टेरियल स्टिफनेस (धमनियों की सख़्ती) देखी गई—जो हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हाई ब्लड प्रेशर का एक प्रमुख कारण माना जाता है।
महिलाएं क्यों ज्यादा संवेदनशील?
वैज्ञानिकों का कहना है कि महिलाओं की रक्त वाहिकाओं की भीतरी परत कोविड के बाद सूजन और क्षति के प्रति तुलनात्मक रूप से अधिक संवेदनशील दिखती है। हार्मोनल बदलाव भी इस जोखिम को बढ़ा सकते हैं, जिससे संक्रमण के बाद नसों की रिकवरी धीमी हो सकती है।
वायरस नसों को कैसे नुकसान पहुंचाता है?
कोविड-19 धमनियों की अंदरूनी परत यानी एंडोथीलियल लाइनिंग को निशाना बनाता है।
जब यह परत क्षतिग्रस्त होती है, तो नसों की लोच (इластिसिटी) कम होने लगती है, जिससे —
- धमनियां कठोर होने लगती हैं
- ब्लड फ्लो पर असर पड़ता है
- दिल पर अतिरिक्त दबाव बढ़ जाता है
यह प्रक्रिया रक्त वाहिकाओं की उम्र को वास्तविक उम्र से आगे धकेल देती है।
राहत की खबर: वैक्सीन और रिकवरी से हो सकती है सुधार
शोध में यह भी पाया गया कि नियमित वैक्सीनेशन और संक्रमण के बाद समय के साथ होने वाली स्वाभाविक रिकवरी नसों के नुकसान को काफी हद तक कम कर सकती है।
कई मामलों में कुछ महीनों में धमनियों की लोच वापस लौटती देखी गई है।
विशेषज्ञों की सलाह
डॉक्टर्स का कहना है कि कोविड से ठीक होने के बाद भी हार्ट हेल्थ को नज़रअंदाज़ न करें।
खासकर महिलाओं को—
- समय-समय पर ब्लड प्रेशर और हार्ट चेकअप कराना चाहिए
- किसी भी तरह की थकान, धड़कन बढ़ने या सांस में तकलीफ को हल्के में नहीं लेना चाहिए
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विशेषज्ञों की राय है कि शुरुआती पहचान और सही समय पर देखभाल से भविष्य में होने वाली गंभीर बीमारियों को रोका जा सकता है।









