उत्तर प्रदेश के बस्ती जनपद से जुड़ा एक अहम उपभोक्ता विवाद सामने आया है, जहां जिला उपभोक्ता आयोग ने रेलवे विभाग पर 9 लाख 10 हजार रुपये का भारी मुआवजा लगाया है। यह फैसला एक छात्रा की उस शिकायत पर आया है, जिसमें उसने ट्रेन की देरी के कारण नीट परीक्षा से वंचित होने की बात कही थी।
परीक्षा केंद्र तक नहीं पहुंच सकी छात्रा
बस्ती के कोतवाली थाना क्षेत्र स्थित पिकौरा बक्स मोहल्ले की रहने वाली समृद्धि वर्ष 2018 में नीट की तैयारी कर रही थीं। उनका परीक्षा केंद्र लखनऊ के जयनारायण पीजी कॉलेज में निर्धारित था। परीक्षा के दिन वह बस्ती से लखनऊ जाने के लिए इंटरसिटी सुपरफास्ट ट्रेन से रवाना हुईं।
ट्रेन का निर्धारित पहुंच समय सुबह 11 बजे था, लेकिन ट्रेन करीब ढाई घंटे की देरी से लखनऊ पहुंची। परीक्षा केंद्र पर रिपोर्टिंग का समय 12:30 बजे था, ऐसे में वह समय पर नहीं पहुंच सकीं और परीक्षा देने से वंचित रह गईं।
उपभोक्ता आयोग पहुंचा मामला
इस घटना से आहत समृद्धि ने इसे रेलवे की लापरवाही बताते हुए जिला उपभोक्ता आयोग में शिकायत दर्ज कराई। उनके अधिवक्ता प्रभाकर मिश्रा के अनुसार, रेलवे मंत्रालय, रेलवे के महाप्रबंधक और स्टेशन अधीक्षक को नोटिस भेजे गए, लेकिन कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिला। इसके बाद सितंबर 2018 में औपचारिक रूप से मुकदमा दायर किया गया।
रेलवे ने देरी मानी, कारण नहीं बताया
करीब सात वर्षों तक चले इस मुकदमे में आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनीं। सुनवाई के दौरान रेलवे ने ट्रेन के विलंब की बात स्वीकार की, लेकिन देरी का स्पष्ट कारण प्रस्तुत नहीं कर सका। इसे सेवा में कमी मानते हुए आयोग ने रेलवे को दोषी ठहराया।
45 दिन में भुगतान का आदेश
जिला उपभोक्ता आयोग के अध्यक्ष न्यायाधीश अमरजीत वर्मा और सदस्य अजय प्रकाश सिंह की पीठ ने रेलवे को 9 लाख 10 हजार रुपये मुआवजा देने का आदेश दिया। साथ ही यह भी कहा गया कि यदि 45 दिनों के भीतर भुगतान नहीं किया गया, तो पूरी राशि पर 12 प्रतिशत वार्षिक ब्याज भी देना होगा।
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इस फैसले के बाद रेल प्रशासन में हलचल मची हुई है। यह मामला न केवल यात्रियों के अधिकारों को रेखांकित करता है, बल्कि परीक्षा जैसे महत्वपूर्ण अवसरों में समयबद्ध सेवाओं की अहमियत भी उजागर करता है।







