Mumbai Blast Case: बॉम्बे हाईकोर्ट ने सोमवार को 2006 के मुंबई ट्रेन बम धमाकों के मामले में दोषी ठहराए गए सभी 12 आरोपियों को बरी कर दिया। इस हमले में 189 लोगों की मौत हुई थी और 800 से अधिक लोग घायल हुए थे। हाईकोर्ट का यह फैसला करीब दो दशक बाद आया है जब मुंबई की उपनगरीय रेलवे नेटवर्क पर हुए सीरियल ब्लास्ट ने पूरे देश को हिला दिया था।
न्यायमूर्ति रेवती मोहिते डेरे और गौरी गोडसे की खंडपीठ ने फैसले का संक्षिप्त भाग पढ़ा और अभियोजन पक्ष की दलीलों में गंभीर खामियों की ओर इशारा किया। कोर्ट ने कहा कि प्रमुख गवाह अविश्वसनीय पाए गए, पहचान परेड पर सवाल खड़े हुए, और कबूलनामे प्रताड़ना के माध्यम से लिए गए थे।
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कोर्ट ने कहा, ‘रक्षा पक्ष ने पहचान परेड को लेकर गंभीर सवाल उठाए थे। कई गवाह वर्षों तक चुप रहे और फिर अचानक आरोपियों की पहचान कर दी। यह असामान्य है।’
एक गवाह, जो पहले से ही कई अन्य मामलों में गवाही दे चुका था, उसकी गवाही को कोर्ट ने अविश्वसनीय बताया। अन्य कई गवाह यह स्पष्ट नहीं कर सके कि वे वर्षों बाद अचानक आरोपियों को कैसे पहचान पाए।
न्यायाधीशों ने कार्यवाही में प्रक्रियात्मक चूक को भी उजागर किया। कोर्ट ने कहा, ‘कुछ गवाहों की तो सुनवाई के दौरान गवाही भी नहीं ली गई। RDX और अन्य विस्फोटक सामग्री की जब्ती को लेकर अभियोजन यह साबित नहीं कर सका कि जब्त सबूत सुरक्षित रूप से फॉरेंसिक लैब तक पहुंचे थे।’
कोर्ट ने अभियोजन की जांच पर सवाल उठाते हुए कहा कि इसमें सोच-समझ का अभाव था और निष्कर्ष निकाला कि अभियोजन पक्ष अपने आरोपों को उचित संदेह से परे साबित करने में पूरी तरह विफल रहा।
इस फैसले से विशेष मकोका अदालत का अक्टूबर 2015 का वह निर्णय रद्द हो गया, जिसमें पांच को मौत की सजा और सात को उम्रकैद दी गई थी। 12 दोषियों में से एक, कमाल अंसारी की 2021 में नागपुर जेल में कोविड के कारण मृत्यु हो गई थी। बाकी 11, जो पिछले 19 सालों से जेल में थे, अब रिहा होंगे।
कुछ आरोपियों के वकील युग मोहित चौधरी ने कहा, ‘यह फैसला उन लोगों के लिए आशा की किरण है जो गलत तरीके से जेल में बंद हैं।’ bench ने कहा, ‘हमने अपना कर्तव्य निभाया और यह हमारी जिम्मेदारी थी।’
सरकारी वकील राजा ठाकरे ने कहा कि यह फैसला भविष्य की कानूनी कार्यवाहियों के लिए मार्गदर्शक सिद्ध होगा 2006 के मुंबई ट्रेन धमाके भारत के सबसे भीषण आतंकी हमलों में से एक थे, जिसमें पश्चिम रेलवे की फर्स्ट क्लास बोगियों में पीक आवर्स के दौरान सात बम फटे थे।









