बिहार विधानसभा चुनाव के लिए बीजेपी ने अपनी पहली उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 71 उम्मीदवारों के नाम शामिल हैं, जिसमें पार्टी ने कई चौंकाने वाले फैसले लेते हुए कई सीनियर नेताओं के टिकट काटे हैं। पटना साहिब सीट से सात बार विधायक रह चुके नंद किशोर यादव का टिकट भी इस बार काट दिया गया है।
उनकी जगह अब रत्नेश कुशवाहा को पार्टी ने चुनावी मैदान में उतारा है। इस फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए नंद किशोर यादव ने भावुक लेकिन संयमित प्रतिक्रिया दी। उन्होंने कहा, “मैं भारतीय जनता पार्टी के निर्णय के साथ हूं। पार्टी ने मुझे बहुत कुछ दिया है। नई पीढ़ी का स्वागत है, अभिनंदन है।”
जनता का स्नेह कभी नहीं भूलूंगा – नंद किशोर यादव
अपने समर्थकों और क्षेत्र की जनता के प्रति आभार जताते हुए उन्होंने कहा, “पटना साहिब की जनता ने मुझे सात बार विधायक बनाया। जिस प्रेम और समर्थन के साथ उन्होंने मुझे जीत दिलाई, उसे मैं कभी नहीं भूल पाऊंगा।”
पहली सूची में 71 उम्मीदवारों के नाम
बीजेपी की ओर से मंगलवार दोपहर को जारी की गई इस सूची में पहले चरण की 38 और दूसरे चरण की 33 सीटों पर प्रत्याशियों के नाम घोषित किए गए हैं। इन 71 उम्मीदवारों में 9 महिला उम्मीदवारों को भी टिकट दिया गया है।
इन दिग्गजों को मिला टिकट
- रेणु देवी को फिर से बेतिया से मैदान में उतारा गया है।
- तारकेश्वर प्रसाद को कटिहार से टिकट मिला है।
- विजय कुमार सिन्हा, जो राज्य के डिप्टी सीएम हैं, उन्हें लखीसराय से प्रत्याशी बनाया गया है।
इन वरिष्ठ नेताओं के कटे टिकट
भाजपा ने इस बार कई पुराने चेहरों को टिकट न देकर नए उम्मीदवारों को मौका दिया है।
- नंद किशोर यादव (पटना साहिब) की जगह रत्नेश कुशवाहा
- मोतीलाल प्रसाद (रिगा) की जगह बैद्यनाथ प्रसाद
- रामसूरत राय (औराई) की जगह रमा निषाद
- अमरेंद्र प्रताप सिंह, वरिष्ठ विधायक, को भी टिकट नहीं दिया गया है।
सीट बंटवारे के बाद जारी की गई सूची
गौरतलब है कि एनडीए में सीटों के बंटवारे के बाद बिहार बीजेपी की प्रत्याशियों की सूची का लंबे समय से इंतजार किया जा रहा था। अब पार्टी ने पहले दो चरणों के उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है और बाकी सीटों पर उम्मीदवारों की घोषणा आने वाले दिनों में की जाएगी।
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बीजेपी की पहली सूची ने यह साफ संकेत दे दिया है कि पार्टी इस बार नवीन चेहरों और युवा नेतृत्व पर दांव लगाने के मूड में है। हालांकि कुछ वरिष्ठ नेताओं का टिकट कटना समर्थकों के लिए चौंकाने वाला हो सकता है, लेकिन खुद नंद किशोर यादव जैसे अनुभवी नेता का संयमित और पार्टी के प्रति समर्पित रवैया बताता है कि वे इस फैसले को संगठनात्मक प्राथमिकता मानते हैं।









