बिहार में आगामी विधानसभा चुनाव को लेकर महागठबंधन में शामिल भाकपा-माले (CPIML) ने अपने उम्मीदवारों की पहली सूची जारी कर दी है। इस सूची में कुल 18 सीटों पर पार्टी ने अपने प्रत्याशी उतारे हैं, जिनमें सामाजिक न्याय, युवाओं और महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है।
सबसे ज्यादा चर्चा का विषय बनी है दीघा सीट से दिव्या गौतम को टिकट दिया जाना। दिव्या, दिवंगत अभिनेता सुशांत सिंह राजपूत की ममेरी बहन हैं और पहली बार चुनावी मैदान में उतर रही हैं। उनका चयन पार्टी द्वारा युवाओं और महिलाओं को सशक्त बनाने की दिशा में एक बड़ा कदम माना जा रहा है।
पहली सूची में शामिल उम्मीदवार और विधानसभा क्षेत्र:
| क्रम | विधानसभा सीट (क्रमांक) | उम्मीदवार का नाम |
|---|---|---|
| 1 | तरारी (196) | मदन सिंह चन्द्रवंशी |
| 2 | अगिआंव (SC) (195) | शिवप्रकाश रंजन |
| 3 | आरा (194) | कयामुद्दीन अंसारी |
| 4 | डुमरांव (201) | अजीत कुमार सिंह उर्फ अजीत कुशवाहा |
| 5 | काराकाट (213) | अरुण सिंह |
| 6 | अरवल (214) | महानंद सिंह |
| 7 | घोषी (217) | रामबली सिंह यादव |
| 8 | पालीगंज (190) | संदीप सौरभ |
| 9 | फुलवारी (SC) (188) | गोपाल रविदास |
| 10 | दीघा (181) | दिव्या गौतम |
| 11 | दरौली (SC) (107) | सत्यदेव राम |
| 12 | जिरादेई (106) | अमरजीत कुशवाहा |
| 13 | दरौंदा (109) | अमरनाथ यादव |
| 14 | भोरे (SC) (103) | जितेंद्र पासवान |
| 15 | सिकटा (09) | वीरेंद्र प्रसाद गुप्ता |
| 16 | वारिसनगर (132) | फूलबाबू सिंह |
| 17 | कल्याणपुर (SC) (131) | रंजीत राम |
| 18 | बलरामपुर (65) | महबूब आलम |
सामाजिक समीकरणों का रखा गया ध्यान
भाकपा-माले ने अपनी सूची में दलित, पिछड़े, अल्पसंख्यक और महिला उम्मीदवारों को प्राथमिकता दी है। दीघा सीट से दिव्या गौतम को उतारने का फैसला पार्टी की रणनीति में एक बड़ा बदलाव माना जा रहा है, जो युवा और शहरी मतदाताओं को जोड़ने की दिशा में उठाया गया कदम है।
अनुभवी और नए चेहरों का मेल
इस सूची में कुछ वर्तमान विधायक और वरिष्ठ नेता भी शामिल हैं, जैसे बलरामपुर से महबूब आलम और पालीगंज से संदीप सौरभ। वहीं, दिव्या गौतम जैसे नए और प्रभावशाली चेहरों को मैदान में उतारकर पार्टी ने ताजगी और उम्मीद का संदेश दिया है।
महागठबंधन में सीट बंटवारे के बाद भाकपा-माले की पहल
महागठबंधन में सीटों के बंटवारे के बाद भाकपा-माले पहली पार्टी है जिसने अपने उम्मीदवारों की सूची सार्वजनिक की है। इससे यह भी संकेत मिलते हैं कि पार्टी ने अपने संगठनात्मक ढांचे और रणनीति को पहले से तैयार कर रखा था।
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भाकपा-माले की यह पहली सूची साफ संकेत देती है कि पार्टी 2025 के विधानसभा चुनाव में विविध सामाजिक वर्गों को प्रतिनिधित्व देने और युवाओं को राजनीति में लाने के एजेंडे पर काम कर रही है। अब देखना यह होगा कि बाकी महागठबंधन दलों की सूचियां कब तक सामने आती हैं और चुनावी मुकाबले में क्या समीकरण बनते हैं।









