केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को 23 साल पुराने एक बड़े आर्थिक अपराध के मामले में बड़ी सफलता मिली है। करीब दो दशकों से अधिक समय से फरार चल रही मोनिका कपूर को अमेरिका से प्रत्यर्पित कर भारत लाया गया है। यह कार्रवाई 9 जुलाई 2025 को पूरी की गई, जब सीबीआई की टीम उसे कस्टडी में लेकर अमेरिका से भारत पहुंची।
मोनिका कपूर, जो ‘Monika Overseas’ नामक फर्म की प्रोपराइटर थी, पर अपने दो भाइयों—राजन खन्ना और राजीव खन्ना—के साथ मिलकर एक्सपोर्ट-इम्पोर्ट से जुड़े एक बड़े फर्जीवाड़े को अंजाम देने का आरोप है। वर्ष 1998 में इन लोगों ने नकली शिपिंग बिल्स, इनवॉयस और फर्जी बैंक सर्टिफिकेट तैयार कर 6 रीप्लेनिशमेंट लाइसेंस प्राप्त किए थे। इन लाइसेंस के जरिए करीब 2.36 करोड़ रुपये का ड्यूटी-फ्री सोना मंगवाया गया था।
इसके बाद इन लाइसेंस को अहमदाबाद की एक कंपनी, Deep Exports, को प्रीमियम पर बेच दिया गया। Deep Exports ने इनका इस्तेमाल कर बड़ी मात्रा में सोना आयात किया, जिससे सरकार को 1.44 करोड़ रुपये का राजस्व नुकसान हुआ।
इस घोटाले की जांच के बाद CBI ने 31 मार्च 2004 को मोनिका कपूर, राजन खन्ना और राजीव खन्ना के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की थी। IPC की धारा 120-B (आपराधिक साजिश), 420 (धोखाधड़ी), 467, 468 और 471 (जालसाजी से संबंधित धाराएं) के तहत केस दर्ज किया गया था।

हालांकि 20 दिसंबर 2017 को दिल्ली की साकेत कोर्ट ने राजन और राजीव को दोषी करार दे दिया, लेकिन मोनिका कपूर जांच और अदालती कार्यवाही से बचती रही। 13 फरवरी 2006 को अदालत ने उसे Proclaimed Offender घोषित कर दिया था, और 2010 में इंटरपोल ने उसके खिलाफ Red Corner Notice जारी किया था।
CBI ने उसी वर्ष अमेरिका को मोनिका कपूर के प्रत्यर्पण की आधिकारिक मांग भेजी थी। इसके बाद लगातार कानूनी कार्यवाही और अमेरिकी एजेंसियों के सहयोग से आखिरकार उसे भारत लाने में सफलता मिली।
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अब मोनिका कपूर को दिल्ली की अदालत में पेश किया जाएगा, जहां वह अपने खिलाफ लगे गंभीर आरोपों का सामना करेगी। CBI की इस कामयाबी को एक बड़ी कानूनी और राजनयिक सफलता के रूप में देखा जा रहा है।









