बिहार में जाति आधारित भेदभाव लंबे समय से सामाजिक विकास की राह में बड़ी चुनौती बना हुआ है। इसी सोच को बदलने और समाज में समानता व भाईचारे को बढ़ावा देने के उद्देश्य से राज्य सरकार ने अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना लागू की है। इस योजना के जरिए सरकार उन लोगों को प्रोत्साहित कर रही है, जो जाति की सीमाओं को तोड़कर विवाह का निर्णय लेते हैं।
योजना का उद्देश्य
इस योजना का मुख्य लक्ष्य समाज में व्याप्त जातिवाद, छुआछूत और भेदभाव को कम करना है। सरकार का मानना है कि अलग-अलग जातियों के बीच वैवाहिक संबंध बनने से सामाजिक दूरी घटेगी और समरसता को बढ़ावा मिलेगा।
कितनी मिलेगी प्रोत्साहन राशि?
राज्य सरकार इस योजना के तहत पात्र नवविवाहित जोड़ों को एक लाख रुपये तक की आर्थिक सहायता प्रदान करती है। यह राशि प्रोत्साहन के रूप में दी जाती है, ताकि लोग बिना किसी सामाजिक दबाव के अंतरजातीय विवाह को अपनाएं।
कौन ले सकता है योजना का लाभ?
सरकार ने योजना के लिए कुछ स्पष्ट नियम और शर्तें तय की हैं, जिनका पालन करना अनिवार्य है:
- नवविवाहित जोड़ा बिहार का स्थायी निवासी होना चाहिए।
- विवाह में एक पक्ष अनुसूचित जाति (SC) या अनुसूचित जनजाति (ST) से और दूसरा पक्ष सवर्ण या अन्य पिछड़ा वर्ग (OBC) से होना चाहिए।
- शादी कानूनी रूप से मान्य होनी चाहिए और विवाह का पंजीकरण अनिवार्य है।
- लड़की की न्यूनतम आयु 18 वर्ष और लड़के की 21 वर्ष होनी चाहिए।
- पति-पत्नी का जॉइंट बैंक अकाउंट होना जरूरी है, जो आधार से लिंक हो।
- विवाह का पंजीकरण विशेष विवाह अधिनियम, 1954 या हिंदू विवाह अधिनियम, 1955 के तहत होना चाहिए।
यह भी पढ़ें: नए साल पर दिल्ली, यूपी और बिहार का मौसम कैसा रहेगा?
सामाजिक बदलाव की दिशा में पहल
अंतरजातीय विवाह प्रोत्साहन योजना सिर्फ आर्थिक सहायता तक सीमित नहीं है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक सोच और समानता को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम है। सरकार को उम्मीद है कि इस पहल से आने वाले समय में जातिगत भेदभाव कम होगा और बिहार सामाजिक एकता की मिसाल बनेगा।









