• Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact
Thursday, March 12, 2026
  • Login
पंचायती टाइम्स
Advertisement
  • पंचायती टाइम्स
  • भारत
  • पंचायत
    • कृषि समाचार
  • खेल
  • जुर्म
  • राज्यों से
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा / जॉब
  • दुनिया
  • बिज़नेस
    • IFIE
    • नई तकनीकी
    • ऑटोमोबाइल
  • English
  • पंचायती टाइम्स
  • भारत
  • पंचायत
    • कृषि समाचार
  • खेल
  • जुर्म
  • राज्यों से
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा / जॉब
  • दुनिया
  • बिज़नेस
    • IFIE
    • नई तकनीकी
    • ऑटोमोबाइल
  • English
No Result
View All Result
पंचायती टाइम्स
  • पंचायती टाइम्स
  • भारत
  • पंचायत
  • खेल
  • जुर्म
  • राज्यों से
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा / जॉब
  • दुनिया
  • बिज़नेस
  • English
Home दुनिया

US Polls 2024: क्या राज़ है कि अमेरिका में नहीं बन पाई कोई महिला प्रेजिडेंट ?

अमेरिका को सभ्य हुए तो काफी साल हो गए..उसके लोकतंत्र को भी लम्बा वक्त हो गया है..फिर ऐसी क्या वजह थी कि कोई महिला प्रेजिडेंट नहीं बनने दी अमेरिकियों ने ?

Parijat Tripathi by Parijat Tripathi
6 November 2024
in दुनिया
0
The US awaits its first ever Madam President

The US awaits its first ever Madam President

Share on FacebookShare on Twitter

आम लोगों से आम जवाब मिलते हैं. एक्सपर्ट जवाब तो सिर्फ एक्सपर्टों से मिलते हैं. कोई अमेरिकी मैडम कभी प्रेजिडेंट क्यों नहीं बन पाई, इसकी वजह एक्सपर्ट लोग तीन बातों को मानते हैं.

पहला कारण है सामाजिक. आज की बात छोड़ कर पहले की बात करें तो अमेरिकी समाज में लोग अपनी पत्नियों को राजनीति से दूर रखना चाहते रहे हैं. ज़ाहिर ही है, यहां के लोगों की मानसिकता पर पुरुषवाद हावी रहा, तभी वे नहीं चाहते रहे कि उनकी पत्नियां राजनीति में आ कर सशक्त हो जाएँ. आर्थिक सशक्तता से बड़ी सशक्तता सत्ता की होती है, अर्थ और आर्थिक शक्तियां जिसके पीछे चलती हैं.

सामाजिक कारण

सभ्य हो जाना इस बात का प्रमाण नहीं होता कि समाज में स्वतंत्रता और समानता का न्याय स्थापित हो गया है. अमेरिका में सभ्यता के मुकाबले समानता पिछड़ी रही और अब जा कर कहीं उसने अपना मुकाम पाया है. आज अमेरिका में पुरुषों का नहीं महिलाओं का राज है जिसको सशक्त किया देश के क़ानून ने.

अमेरिकी राजनीति की एक्सपर्ट आइरीन नतिविदाद कहती हैं कि दुनिया के दूसरे देशों में जो हुआ अमेरिका में भी वही हुआ. अमेरिका में भी महिलाओं को बहुत से बुनियादी अधिकार पुरुषों की तुलना में काफी देर से मिले, उदाहरण के लिए, अमेरिका की स्वतंत्रता के पूर्व यहां स्कूलों में लड़कों को तो पढ़ना-लिखना दोनों सिखाया जाता था, पर लड़कियों को लिखना नहीं सिखाया जाता था.

यही वजह थी कि महिलाएं पढ़ तो पाती थीं, पर लिख नहीं सकती थीं. इसलिए दस्तखत के तौर पर वे अपने नाम की जगह “X” लिखती थीं. उनको प्रॉपर्टी के अधिकार भी नहीं दिए गए थे. कारणों से वे सामाजिक तौर पर पुरुषों से पिछड़ने लगीं. काफी समय लगा उनको हर क्षेत्र में पुरुषों को टक्कर देने में.

सर्वे एजेंसी गैलप का स्पष्टीकरण इस प्रश्न पर ये था कि साल 1937 में करीब 64% लोगों का मानना था कि महिलाएं राष्ट्रपति पद के योग्य नहीं हैं. लोग कहते थे कि राजनीति पुरुषों की दुनिया है और इसको ऐसे ही होना चाहिए. एजेंसी बताती है कि आज भी 5% से ज्यादा पुरुष वोटर महिलाओं के लिए यही सोच रखते हैं.

शुरुआत में अमेरिका की फिल्मों में औरतों को घर का काम संभालना, पति के साथ प्यार करना और बच्चों को जन्म देना – दिखाया गया. साल 1950 की बात करें ये वो दौर था जब अमेरिका की महिलाओं की स्वतंत्रता फिर से छिन गई थी.

उस वक्त के गणमान्य लोग कहने लगे कि सोसायटी काम पर जाने वाली महिलाओं के कारण सोसाइटी में बुराइयां पैदा हो रही हैं. इस तरह की सोच का असर न केवल कामकाजी महिलाओं के जीवन पर पड़ा बल्कि इससे अमेरिका की चुनावी राजनीति में हिस्सा लेने वाली महिलायें भी हतोत्साहित हुईं .

साल 1958 में अचानक कोया न्यूटसन नाम वाली एक सांसद का मन उपचुनाव लड़ने को मचल गया. तो उसके खिलाफ लोगों ने उसके एक्स हसबैंड एंड्रयू न्यूटसन को ढूंढ निकाला और उसको पैसा देकर कोया के विरुद्ध उससे कैंपेन कराया.

योजना बना कर एंड्रयू से एक पत्र लिखवाया गया जिसमें कोया से उसने उसकी जिंदगी में वापस आने और घर लौटने की अपील की थी. यह पत्र अखबार में छपे इस पत्र में लोगों ने पढ़ा कि इस लेटर में लिखा था कि पति का घर ही पत्नी के लिए सही जगह है. इस तरह के प्रचार का प्रभाव ये हुआ कि कोया हार गईं.

राजनीतिक कारण

राजनीतिक कारण भी रहा इस स्थिति के लिए जिम्मेदार. अमेरिका की महिलाओं को देश की स्वतन्त्रता के बाद अपनी स्वतंत्रता के लिए लगभग डेढ़ सौ साल लग गए. आज़ाद अमेरिका में करीब 141 साल बाद महिलाओं को मिले थे वोटिंग राइट्स. ज़ाहिर है इस तरह पूरे 141 साल किसी चुनावी मैदान में उतरने का मौका ही नहीं था उनके पास.

वो था 18 अगस्त, 1920 का दिन जब महिलाओं को पता चला कि देश ने उनको वोटिंग करने का अधिकार दे दिया है.

हैरानी की बात ये भी है कि जिन 7 लोगों को अमेरिका का फाउंडिंग फादर माना गया है, इनमें कोई भी महिला नहीं है. पहला राष्ट्रपति चुनाव अमेरिकी जनता ने साल 1789 में देखा था लेकिन इस समय महिलाएं घरों में बंद थीं.

अमेरिकी राजनीतिक मामलों के जानेमाने विशेषज्ञ डेबी वाल्श का इस बात पर विचार थोड़ा अलग है. महिलाओं को चुनावों में बारह पत्थर बाहर रखने की बात पर उनका कहना है कि दुसरे देशों में लोग पार्टी को वोट करके जिताते हैं और फिर वो पार्टी पीएम का चुनाव करती है. इसके विपरीत अमेरिका में वोटर सीधे राष्ट्रपति के लिए वोटिंग करते हैं, इस कारण महिलाओं के लिए मुश्किल पेश आती है.

इस स्थिति का कारण ये है कि अमेरिका में लोग मानते हैं कि महिलाओं में युद्ध जैसे मुश्किल हालात में नेतृत्व के लिए जो मानसिक एवं शारीरिक क्षमता चाहिए, वो महिलाओं में नहीं है, दूसरी तरफ पुरुषों में ये गुण सहजात और वंशानुगत हैं.

भारत का उदाहरण देते हुए डेबी वाल्श कहती हैं कि भारत की एकमात्र महिला प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी का आक्रमक और प्रभावशाली व्यक्तित्व उनकी लोकप्रियता का कारण बना था. दूसरी तरफ 231 साल के चुनावी इतिहास में दुनिया की महाशक्ति अमेरिका आज तक संसद में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़ाने के लिए के लिए एक सशक्त नीति निर्मित नहीं कर पाया है.

Previous Post

Delhi AQI: रोइये कि आप दिल्ली में हैं ..जहां Population कम Pollution ज्यादा है!

Next Post

New American President 2024: ट्रंप कार्ड चला, कमला का दम निकला!

Parijat Tripathi

Parijat Tripathi

Related Posts

दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन गिरने से हड़कंप, भारतीय भी घायल - Panchayati Times
दुनिया

दुबई एयरपोर्ट के पास ड्रोन गिरने से हड़कंप, एक भारतीय भी घायल 

11 March 2026
ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का दोषी करार निकला पाकिस्तानी - Panchayati Times
दुनिया

ट्रंप की हत्या की साजिश रचने का दोषी करार निकला पाकिस्तानी 

7 March 2026
कौन है नेपाल के पीएम दावेदार बालेन शाह? - Panchayati Times
दुनिया

कौन है नेपाल के पीएम दावेदार बालेन शाह? 

6 March 2026
ट्रंप–नेतन्याहू युद्ध की कीमत भारत चुका रहा: ब्रह्मा चेलानी - Panchayati Times
दुनिया

ट्रंप–नेतन्याहू युद्ध की कीमत भारत चुका रहा: ब्रह्मा चेलानी

2 March 2026
होर्मुज स्ट्रेट क्या है? जिसके बंद होने पर आएगा तेल का संकट, भारत पर भी पड़ेगा असर - Panchayati Times
दुनिया

होर्मुज स्ट्रेट क्या है? जिसके बंद होने पर आएगा तेल का संकट, भारत पर भी पड़ेगा असर

2 March 2026
US–Israel–Iran Strike: इन देशों तक पहुंचा संघर्ष, भारत पर क्या होगा असर? - Panchayati Times
दुनिया

US–Israel–Iran Strike: इन देशों तक पहुंचा संघर्ष, भारत पर क्या होगा असर?

2 March 2026
Next Post
वापसी राष्ट्रवाद के अमेरिकी नायक की

New American President 2024: ट्रंप कार्ड चला, कमला का दम निकला!

Leave a Reply Cancel reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

पंचायती टाइम्स

पंचायती टाइम्स नई दिल्ली, भारत से प्रकाशित ग्रामीण भारत की आवाज़ को ले जाने वाला एक डिजिटल समाचार पोर्टल है।

पंचायती टाइम्स एकमात्र ऐसा न्यूज पोर्टल है जिसकी पूर्व उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी प्रशंसा करते हुए कहा था कि पंचायती टाइम्स न सिर्फ मीडिया धर्म निभा रहा है बल्कि अपनी सामाजिक जिम्मेदारियां भी निभा रहा है।

Follow Us

Browse by Category

  • English (32)
  • IFIE (253)
  • Uncategorized (32)
  • अजब-गजब (38)
  • ऑटोमोबाइल (25)
  • कृषि समाचार (202)
  • खेल (502)
  • जुर्म (312)
  • दुनिया (314)
  • धर्म (122)
  • नई तकनीकी (133)
  • पंचायत (269)
  • बिज़नेस (223)
  • बिहार चुनाव (78)
  • ब्रेकिंग न्यूज़ (1,063)
  • भारत (2,563)
  • मनोरंजन (287)
  • राजनीति (55)
  • राज्यों से (986)
  • लोकसभा चुनाव 2024 (199)
  • शिक्षा / जॉब (148)
  • स्वास्थ्य (95)

Recent News

IPL 2026 से पहले फिक्सिंग का साया, KKR खिलाड़ी पर ICC के गंभीर आरोप - Panchayati Times

IPL 2026 से पहले फिक्सिंग का साया, KKR खिलाड़ी पर ICC के गंभीर आरोप

12 March 2026
देश में गैस संकट पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने क्या कहा? - Panchayati Times

देश में गैस संकट पर पेट्रोलियम मंत्री हरदीप पुरी ने क्या कहा?

12 March 2026
  • Advertise
  • Privacy & Policy
  • Contact

© 2024 पंचायती टाइम्स. All Rights Reserved

Welcome Back!

Login to your account below

Forgotten Password?

Retrieve your password

Please enter your username or email address to reset your password.

Log In
  • Login
  • पंचायती टाइम्स
  • भारत
  • पंचायत
    • कृषि समाचार
  • खेल
  • जुर्म
  • राज्यों से
  • मनोरंजन
  • स्वास्थ्य
  • शिक्षा / जॉब
  • दुनिया
  • बिज़नेस
    • IFIE
    • नई तकनीकी
    • ऑटोमोबाइल
  • English

© 2024 पंचायती टाइम्स. All Rights Reserved