पीएम मोदी ने लोकसभा में परिसीमन से जुड़े विधेयक पर चर्चा की शुरुआत करते हुए इसे देश के लोकतांत्रिक इतिहास का अहम क्षण बताया। उन्होंने कहा कि राष्ट्र के जीवन में कुछ अवसर ऐसे आते हैं, जब समाज की सोच भविष्य की मजबूत नींव रखती है और यह भी वैसा ही एक अवसर है।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि इस तरह के सुधार 25-30 साल पहले लागू कर दिए गए होते, तो आज तक वे पूरी तरह परिपक्व हो चुके होते। उन्होंने भारत को “मदर ऑफ डेमोक्रेसी” बताते हुए इसकी लंबी लोकतांत्रिक परंपरा का उल्लेख किया।
पंचायतों में आरक्षण का उदाहरण
अपने संबोधन में पीएम मोदी ने कहा कि पहले स्थानीय निकायों में आरक्षण देने में कोई हिचक नहीं थी, क्योंकि इससे बड़े राजनीतिक पदों पर असर नहीं पड़ता था। उन्होंने बताया कि इसी सोच के चलते पंचायतों में महिलाओं को 50 प्रतिशत तक आरक्षण मिला।
उन्होंने यह भी कहा कि जो लोग पहले ऐसे कदमों का विरोध करते थे, आज वही जमीनी स्तर पर महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को देख रहे हैं। अब बड़ी संख्या में महिलाएं निर्णय प्रक्रिया में शामिल होने की मांग कर रही हैं।
‘राजनीतिक नजरिए से न देखें’
प्रधानमंत्री ने सभी दलों से अपील करते हुए कहा कि इस मुद्दे को राजनीतिक चश्मे से नहीं देखा जाना चाहिए। उन्होंने कहा कि यह समय मिलकर विकसित भारत के निर्माण के लिए खुलकर निर्णय लेने का है।
उन्होंने विशेष रूप से नारी शक्ति का जिक्र करते हुए कहा कि देश की महिलाएं केवल फैसलों को ही नहीं, बल्कि नेताओं की नीयत को भी परखेंगी। अगर नीयत में खोट होगी, तो उसे माफ नहीं किया जाएगा।
‘किसी के साथ अन्याय नहीं होगा’
पीएम मोदी ने आश्वासन दिया कि परिसीमन की प्रक्रिया में किसी के साथ अन्याय नहीं होगा और वर्तमान व्यवस्था के संतुलन को ध्यान में रखा जाएगा। उन्होंने कहा कि संविधान देश को टुकड़ों में सोचने की अनुमति नहीं देता और कश्मीर से कन्याकुमारी तक भारत एक इकाई है।
‘क्रेडिट लेने की राजनीति नहीं’
प्रधानमंत्री ने विपक्ष की आशंकाओं पर प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि यदि कोई इसे उनका राजनीतिक लाभ मानता है, तो वह इस मुद्दे का श्रेय लेने के लिए तैयार नहीं हैं। उन्होंने कहा कि विधेयक पारित होने के बाद वे सभी दलों को श्रेय देने के लिए भी तैयार हैं।
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पीएम मोदी ने अपने संबोधन में यह संदेश देने की कोशिश की कि परिसीमन जैसे अहम मुद्दे पर राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर व्यापक सहमति बनाना जरूरी है, ताकि देश के लोकतांत्रिक ढांचे को और मजबूत किया जा सके।









