नेपाल इन दिनों गंभीर राजनीतिक और सामाजिक बदलावों के दौर से गुजर रहा है। राजधानी काठमांडू से लेकर देश के अन्य हिस्सों तक लाखों युवा ‘Gen Z आंदोलन’ के तहत सड़कों पर हैं। पारंपरिक राजनीति से मोहभंग और सामाजिक न्याय की मांगों के बीच, इस जनआंदोलन को जिस चेहरे ने सबसे अधिक ऊर्जा और दिशा दी है, वह हैं काठमांडू के मेयर बालेन शाह।
प्रधानमंत्री ओली ने दिया इस्तीफा, जन दबाव बना निर्णायक
लगातार बढ़ते विरोध और जनआंदोलन की तीव्रता को देखते हुए नेपाल के प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली ने आखिरकार अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। सूत्रों के अनुसार, सरकार पर चौतरफा दबाव था – न सिर्फ सड़कों पर, बल्कि सोशल मीडिया, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और मीडिया रिपोर्ट्स के जरिए भी।
बालेन शाह: एक युवा प्रतीक, जो सिर्फ नेता नहीं बल्कि आंदोलन बन चुके हैं
बालेन शाह की छवि सिर्फ एक राजनेता की नहीं, बल्कि एक आंदोलन और बदलाव के प्रतीक की बन चुकी है। उनकी लोकप्रियता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि Time Magazine और The New York Times जैसी वैश्विक मीडिया संस्थाएं भी उन पर विशेष रिपोर्ट कर चुकी हैं।
उनकी सोशल मीडिया पर जबरदस्त पकड़ है। चाहे प्रशासनिक मुद्दे हों या सामाजिक प्रश्न, बालेन के पोस्ट राष्ट्रीय बहस का हिस्सा बन जाते हैं। उनके पहनावे से लेकर विचारों तक, हर चीज युवाओं को आकर्षित करती है। उनके समर्थक उन्हें “नया नेपाल” का चेहरा मानते हैं।
सिविल इंजीनियर से रैपर और फिर मेयर तक का सफर
बालेन शाह का जीवनवृत्त भी उतना ही प्रेरणादायक है जितना उनका नेतृत्व।
उन्होंने सिविल इंजीनियरिंग में डिग्री ली और फिर रैप म्यूजिक के जरिए युवाओं के बीच अपनी पहचान बनाई। लेकिन उनकी असली उड़ान तब शुरू हुई जब उन्होंने 2022 में काठमांडू के मेयर का चुनाव जीता — वह भी बिना किसी राजनीतिक दल की छत्रछाया के।

मेयर बनने के बाद उन्होंने पारंपरिक राजनीति को चुनौती दी और कई साहसिक निर्णयों से यह दिखा दिया कि युवा नेतृत्व व्यवस्था में बदलाव ला सकता है।
‘आदिपुरुष’ विवाद में भी ली थी मुखर भूमिका
2023 में जब विवादित फिल्म ‘आदिपुरुष’ के कुछ संवादों को लेकर नेपाल और भारत में विवाद गहराया था, तब बालेन शाह ने स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाया। उन्होंने धार्मिक भावना को ठेस पहुंचाने वाले डायलॉग्स पर आपत्ति जताई और यह दिखाया कि वे सिर्फ प्रशासनिक नेता नहीं, बल्कि सामाजिक मुद्दों पर भी सजग आवाज हैं।
कैसे शुरू हुआ Gen Z आंदोलन?
यह आंदोलन नेपाली समाज में बढ़ती असमानता, राजनेताओं के परिवारों की ऐशो-आराम की जिंदगी और सोशल मीडिया पर सरकार की सेंसरशिप के खिलाफ शुरू हुआ। युवाओं ने शुरुआत में शांतिपूर्ण ढंग से अपने अधिकारों की मांग की, लेकिन सरकार की कठोर प्रतिक्रिया ने हालात को बिगाड़ दिया।
अब तक की जानकारी के अनुसार, कम से कम 19 प्रदर्शनकारी मारे गए, जिनमें से 18 की मौत काठमांडू में हुई। सैकड़ों घायल हुए हैं और हालात लगातार तनावपूर्ण बने हुए हैं।
बालेन शाह ने बढ़ाया आंदोलन को समर्थन
इन हिंसक हालातों में जब राजनीतिक दलों की भूमिका सवालों के घेरे में थी, तब बालेन शाह ने खुलकर आंदोलन का समर्थन किया। वे न केवल युवाओं के बीच पहुंचे, बल्कि सरकार की नीतियों की खुले मंच पर आलोचना की। उन्होंने इसे “नए नेपाल के लिए युवाओं की आवाज़” बताया।
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नेपाल में चल रहा Gen Z आंदोलन केवल एक विरोध नहीं, बल्कि सत्ता की सोच और व्यवस्था में परिवर्तन की मांग बन चुका है। इस आंदोलन ने बालेन शाह को सिर्फ एक नेता नहीं, बल्कि एक जन प्रतीक बना दिया है।









