उत्तर प्रदेश में पहली बार ‘डिजिटल अरेस्ट’ साइबर ठगी के एक मामले में लखनऊ की CJM कोर्ट ने एक आरोपी को दोषी ठहराते हुए उसे कई धाराओं के तहत 7 साल की सजा सुनाई है। यह अनोखा मामला मई 2023 का है, जब एक व्यक्ति ने खुद को CBI अधिकारी बताकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) की एक डॉक्टर से 85 लाख रुपये की ठगी कर ली थी। आरोपी ने पीड़िता को मनी लॉन्ड्रिंग के झूठे केस में फंसाने और डिजिटल गिरफ्तारी की धमकी दी थी।
आरोपी का नाम: देवाशीष राय (35 वर्ष)
निवासी: गोमती नगर, लखनऊ (मूलतः आजमगढ़ के रहने वाले)
उन्हें IPC की कई धाराओं धोखाधड़ी, जालसाजी, और पहचान छिपाकर अपराध करने के साथ IT एक्ट के तहत दोषी पाया गया। आरोपी मई 2024 से ही जेल में बंद था और पूरे ट्रायल के दौरान उसे ज़मानत नहीं मिली।
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DCP (क्राइम) कमलेश दीक्षित ने बताया, ‘यह भारत का पहला ऐसा डिजिटल अरेस्ट साइबर फ्रॉड केस है, जिसमें आरोपी को पूरे एक साल तक ज़मानत नहीं मिली और अदालत ने उसे दोषी करार दिया। यह लखनऊ पुलिस की साइबर टीम की मेहनत का नतीजा है।’
SHO, साइबर क्राइम थाना, लखनऊ बीके यादव ने बताया, ‘यह उत्तर प्रदेश में डिजिटल गिरफ्तारी से जुड़े साइबर अपराध में पहली सजा है। आरोपी ने पहले खुद को कस्टम अधिकारी और फिर CBI अधिकारी बताकर वीडियो कॉल्स के ज़रिए डॉक्टर सौम्या गुप्ता को डरा-धमका कर 85 लाख रुपये अलग-अलग बैंक खातों में ट्रांसफर करवा लिए। आरोपी ने नकली दस्तावेज, फर्जी टेलीकॉम IDs और शेल बैंक खातों का इस्तेमाल किया था।’
इस मामले ने साइबर अपराध की नई और खतरनाक तकनीकों को उजागर किया है, जिससे आम लोग आसानी से फंस सकते हैं। ऐसे में सभी को सावधान रहने की जरूरत है।









