गांधी मंडेला फाउंडेशन द्वारा दक्षिण अफ्रीका के महान नेता और राष्ट्रपिता नेल्सन मंडेला की 107वीं जयंती पर नई दिल्ली के सत्याग्रह मंडप, गांधी दर्शन एवं गांधी स्मृति, राजघाट में ‘मंडेला दिवस’ का आयोजन किया गया।
कार्यक्रम की शुरुआत नेल्सन मंडेला की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर हुई। समारोह की शुरुआत गांधी मंडेला फाउंडेशन के संस्थापक और महासचिव अधिवक्ता नंदन झा ने फाउंडेशन के बारे में बताया और उपस्थित गणमान्य व्यक्तियों का परिचय कराया।
उन्होंने फाउंडेशन के बारे में बताते हुए कहा कि, ‘यह संस्था दुनिया भर में महात्मा गांधी और नेल्सन मंडेला के विचार जैसे व्यक्तिगत स्वतंत्रता, नागरिक स्वतंत्रता, सत्य, अहिंसा और मानवाधिकारी को बढ़ावा देता है। गांधी मंडेला फाउंडेशन दुनिया भर में शांति, अहिंसा, संस्कृति और सामाजिक कल्याण को बढ़ावा देने वाले नेताओं को सम्मानित करने के लिए दुनिया का प्रतिष्ठित गांधी मंडेला पुरस्कार प्रदान करता है। उन्होंने बताया कि वैश्विक शांति को बढ़ावा देने के लिए पहला गांधी मंडेला पुरस्कार आध्यात्मिक गुरु दलाई लामा को प्रदान किया गया था। वहीं दूसरा पुरस्कार मानवाधिकार कार्यकर्ता, नोबेल शांति पुरस्कार से सम्मानित, नारीवादी, ‘रिगोबर्टा मंचू तुम’ को मैक्सिको में सम्मानित किया जा चुका है।’

यह भी पढ़ें- ‘शूद्र’ शब्द पर सियासी बवाल, अखिलेश ने अनिरुद्धाचार्य महाराज को क्यों कहा- ‘हमारा-आपका रास्ता अलग’
इस अवसर पर गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति के उपाध्यक्ष विजय गोयल ने कहा कि, ‘नेल्सन मंडेला जितना दूर रहे हमसे उतना ही उनका विचार हमारे पास आ गया। मंडेला के विचारों को लेकर जो हम बातें कर रहे हैं वो दूसरों के लिए नहीं, खुद के लिए कर रहे हैं। आपातकाल के दौरान मैं सत्याग्रह करके जेल गया था। 17-18 साल मंडेला के जेल में रहने के दौरान उनके समर्थक और पत्नी ने आंदोलन को जिंदा रखा, उनको भी उसका क्रेडिट मिलना चाहिए। आज का दिन उन सभी लोगों के लिए है जो मानवता, समानता के लिए संघर्ष कर रहे हैं। महात्मा गांधी के कारण वो अहिंसा पर टीके रहें। नेल्सन मंडेला कभी भी महात्मा गांधी से नहीं मिले लेकिन उन्होंने गांधी के विचारों को आत्मसात किया।’

राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) के संपर्क विभाग के प्रचार प्रमुख राम लाल ने कहा कि, ‘कुछ लोग दूसरों के बनाए रास्ते पर चलते हैं लेकिन मंडेला ने एक अलग रास्ता बनाया और उसपर दुनिया चलती है। उनके बनाए मार्ग पर चलने से दुनिया भर में सुख, शांति और सदभावना आएगी।

आज का दिन आजादी, समानता और उत्पीड़न के खिलाफ, प्रेस स्वतंत्रता के खिलाफ संघर्ष करने वालों के स्मरण का दिन है। उन्होंने बताया कि मंडेला के राष्ट्रपति बनने के बाद नस्लभेद खत्म हो गया लेकिन आशंका यह जताई जा रही थी कि जिन गोरों ने रगों के आधार पर लोगों का उत्पीड़न किया था उसके खिलाफ कोई आंदोलन या भेद-भाव न हो जाय। यह नेल्सन मंडेला का व्यक्तित्व था कि गोरों के खिलाफ कोई भेदभाव या उत्पीड़न नहीं हुआ।
इस समारोह का धन्यवाद ज्ञापन बीजेपी के पूर्व राष्ट्रीय उपाध्यक्ष और राष्ट्रीय अध्यक्ष, गांधी मंडेला फाउंडेशन श्याम जाजू ने किया।
मंडेला दिवस के अवसर पर अन्य गणमान्य व्यक्तियों में भारत के पूर्व मुख्य न्यायाधीश एवं राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग के पूर्व अध्यक्ष न्यायमूर्ति के जी बालाकृष्णन (जूरी अध्यक्ष, गांधी मंडेला पुरस्कार, जीएमएफ), डॉ. ओबिजियोफोर एजीनाम (निदेशक, UNESCO MGIEP), श्री संजीत कुमार (निदेशक, गांधी स्मृति एवं दर्शन समिति), एवं कई देशों के राजदूत एवं उसके प्रतिनिधि उपस्थित रहे।









