मोकामा में जेडीयू प्रत्याशी अनंत सिंह के समर्थन में आयोजित जनसभा के दौरान केंद्रीय मंत्री और जेडीयू के वरिष्ठ नेता ललन सिंह के एक बयान ने बिहार की सियासत में हलचल मचा दी है। सोमवार (3 नवंबर) को दिए गए उनके बयान का वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो गया, जिस पर अब विपक्षी दल चुनाव आयोग से कार्रवाई की मांग कर रहे हैं।
वीडियो में ललन सिंह लोगों से यह कहते सुने जा रहे हैं — “एक-दो नेता हैं, उन्हें चुनाव के दिन घर से निकलने मत दीजिए, घर में पैक कर दीजिए। अगर बहुत हाथ-पैर जोड़ें तो साथ लेकर जाइए और अपना वोट दीजिए।” इस बयान को लेकर विपक्ष ने जेडीयू और भाजपा पर चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
कांग्रेस ने उठाए सवाल
कांग्रेस ने अपने एक्स (X) हैंडल से वीडियो साझा करते हुए लिखा, “मोदी सरकार के मंत्री ललन सिंह खुलेआम कह रहे हैं कि जो BJP-JDU के खिलाफ वोट देंगे, उन्हें घर से निकलने मत दो। क्या ‘निष्पक्ष’ चुनाव आयोग इसपर एक्शन लेगा, या फिर हमेशा की तरह सत्तारूढ़ दल के नेताओं को बचाएगा?”
जेडीयू का बचाव
विवाद बढ़ने पर जेडीयू बचाव में उतर आई। पार्टी के प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा कि ललन सिंह के बयान को तोड़-मरोड़कर पेश किया जा रहा है। उन्होंने कहा, “उन्होंने किसी का नाम नहीं लिया। चुनावी माहौल में बोलने की एक शैली होती है। यहां ‘नजरबंद’ करने का मतलब प्रतीकात्मक था। विपक्ष अनावश्यक रूप से मोकामा को राजनीतिक मुद्दा बना रहा है।”
आरजेडी का पलटवार
आरजेडी नेता मनोज झा ने इस मुद्दे पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और चुनाव आयोग पर निशाना साधा। उन्होंने कहा, “प्रधानमंत्री से पूछिए कि ऐसे बयानों पर उनकी चुप्पी क्यों है? जंगलराज के नाम पर भाषण देने वाले अब कानून व्यवस्था और लोकतंत्र पर मौन हैं। चुनाव आयोग भी खामोश क्यों है?”
आयोग की निगरानी में मामला
सूत्रों के मुताबिक, बिहार निर्वाचन कार्यालय ने इस मामले को गंभीरता से लिया है और ललन सिंह के बयान से जुड़ी रिपोर्ट मांगी है। संभावना जताई जा रही है कि आयोग जल्द ही उन्हें नोटिस जारी कर सकता है।
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मोकामा उपचुनाव को लेकर राज्य में पहले से ही राजनीतिक गर्मी चरम पर है, और अब ललन सिंह का यह बयान आने वाले दिनों में सियासी तकरार को और बढ़ा सकता है।









