बिहार विधानसभा चुनाव 2025 के नतीजे आने से पहले ही शपथ ग्रहण को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है। बुधवार, 12 नवंबर 2025, को आरजेडी नेता तेजस्वी यादव ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में दावा किया कि 18 नवंबर को शपथ ग्रहण समारोह होगा। उनके इस बयान ने सूबे की सियासत में नया बवाल खड़ा कर दिया है।
तेजस्वी का दावा — “18 को शपथ ग्रहण तय”
तेजस्वी यादव, जो इस बार फिर राघोपुर विधानसभा सीट से मैदान में हैं, ने कहा कि जनता बदलाव के मूड में है और परिणाम उनकी उम्मीदों के मुताबिक आने वाले हैं। उन्होंने कहा, “हमने पहले भी कहा था कि 14 नवंबर को नतीजे आएंगे और 18 को शपथ ग्रहण होगा। यह निश्चित तौर पर होने जा रहा है। भाजपा और एनडीए के पसीने छूट रहे हैं।”
राजद नेता तेजस्वी ने एग्जिट पोल को लेकर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि मतदान पूरी तरह खत्म होने से पहले ही सर्वे जारी कर दिए गए, जिससे स्पष्ट है कि यह सब मनोवैज्ञानिक दबाव बनाने की रणनीति का हिस्सा है। उन्होंने आरोप लगाया कि ऐसे सर्वे चुनावी अधिकारियों पर असर डालने के लिए कराए जाते हैं।

बीजेपी का पलटवार — “शपथ लें कि चोरी नहीं करेंगे”
तेजस्वी यादव के इस बयान पर बीजेपी ने तीखी प्रतिक्रिया दी है। पार्टी नेता अजय आलोक ने कहा कि तेजस्वी “भ्रम (delusion)” की स्थिति में हैं। उन्होंने तंज कसते हुए कहा,“जब किसी को डिल्यूजन हो जाता है, तो उसे लगता है कि 99 सीटें उसने जीत ली हैं, खुद को मुख्यमंत्री बना लेता है और सरकार भी बना लेता है।”
आलोक ने आगे कहा कि अगर तेजस्वी को शपथ लेनी ही है, तो उन्हें यह शपथ लेनी चाहिए कि उन्होंने जीवन में जितनी गलतियां की हैं, जितना भ्रष्टाचार किया है या अवैध संपत्ति जुटाई है, सब वापस करेंगे और दोबारा ऐसी गलती नहीं दोहराएंगे।
एग्जिट पोल में एनडीए को बढ़त
हाल ही में आए एग्जिट पोल्स में एनडीए गठबंधन को स्पष्ट बहुमत का अनुमान लगाया गया है। अनुमान के मुताबिक, नीतीश कुमार और बीजेपी की सरकार एक बार फिर सत्ता में लौट सकती है। वहीं आरजेडी और महागठबंधन ने इन सर्वेक्षणों को “भ्रामक और पूर्वनियोजित” बताते हुए खारिज किया है।
नतीजों से पहले बढ़ा सियासी तापमान
14 नवंबर को वोटों की गिनती से पहले बिहार का सियासी तापमान चरम पर है। तेजस्वी यादव जहां आत्मविश्वास से भरे नजर आ रहे हैं, वहीं बीजेपी नेताओं के बयान बताते हैं कि दोनों पक्षों में मानसिक बढ़त हासिल करने की जंग छिड़ चुकी है।
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अब सबकी निगाहें 14 नवंबर पर टिकी हैं, जब तय होगा कि बिहार की सत्ता पर किसका परचम लहराएगा — तेजस्वी का दावा सही साबित होता है या एनडीए की जीत पक्की होती है।









