भारत में जहरीली कफ सिरप की वजह से बच्चों की मौतों ने देशभर में हड़कंप मचा दिया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने इस मामले में गंभीर रुख अपनाते हुए तीन भारतीय फार्मा कंपनियों की कफ सिरप को लेकर चेतावनी जारी की है। मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों से बच्चों की मौत के मामले सामने आए हैं, जिसके बाद इन सिरप्स को लेकर अलर्ट जारी किया गया है।
WHO की रिपोर्ट में बताया गया है कि तमिलनाडु स्थित श्रीसन फार्मा की ‘कोल्ड्रिफ’, हिमाचल प्रदेश की रेडनेक्स फार्मा की ‘रेस्पिफ्रेश टीआर’ और उत्तराखंड की शेप फार्मा की ‘रिलाइप सिरप’ के कुछ बैच में जहरीले केमिकल की मौजूदगी पाई गई है। जांच में इन दवाओं में डायएथिलीन ग्लाइकोल (DEG) नामक एक खतरनाक रसायन मिला है, जो सीधे तौर पर बच्चों की जान ले सकता है।
क्या है डायएथिलीन ग्लाइकोल और क्यों है खतरनाक?
डायएथिलीन ग्लाइकोल एक ऐसा केमिकल है जिसका कोई रंग और गंध नहीं होता, लेकिन इसका सेवन शरीर में जहरीले असर डालता है। आमतौर पर इसका उपयोग सिरप को मीठा बनाने के लिए किया जाता है, लेकिन इसकी अधिक मात्रा बेहद घातक साबित हो सकती है। WHO के अनुसार, यह केमिकल किडनी फेलियर और न्यूरोलॉजिकल नुकसान जैसे गंभीर रोगों का कारण बन सकता है।
श्रीसन फार्मा पर कार्रवाई, कंपनी बंद
मामले की गंभीरता को देखते हुए तमिलनाडु सरकार ने श्रीसन फार्मा का लाइसेंस रद्द कर दिया है और कंपनी को तत्काल बंद करने का आदेश जारी किया गया है। राज्य औषधि नियंत्रण विभाग द्वारा की गई जांच में यह सामने आया कि सिरप में 48.6% डायएथिलीन ग्लाइकोल पाया गया था। इसके बाद कंपनी के मालिक जी. रंगनाथन को गिरफ्तार कर लिया गया है।
WHO ने क्या कहा?
WHO ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर चेतावनी जारी करते हुए कहा है कि यदि कहीं पर भी ये सिरप्स बाजार में दिखें तो उसकी तत्काल सूचना स्वास्थ्य अधिकारियों को दें। एजेंसी का कहना है कि इन उत्पादों का सेवन बच्चों के लिए बेहद घातक साबित हो सकता है, और इनके वितरण और उपयोग को तत्काल रोका जाना चाहिए।
भारत में पहले भी हुए हैं ऐसे मामले
यह पहली बार नहीं है जब भारत में जहरीले सिरप की वजह से बच्चों की मौत हुई हो। पिछले कुछ वर्षों में गाम्बिया और उज्बेकिस्तान जैसे देशों में भी भारत निर्मित कफ सिरप को लेकर विवाद हो चुका है। इस बार मामला घरेलू स्तर पर सामने आया है, जिससे भारत की दवा निर्माण व्यवस्था और गुणवत्ता नियंत्रण प्रणाली पर फिर सवाल खड़े हो गए हैं।
क्या करें अभिभावक?
स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सलाह दी है कि अभिभावक किसी भी कफ सिरप को खरीदने से पहले डॉक्टर की सलाह जरूर लें और अनब्रांडेड या सस्ती दवाओं से बचें। साथ ही यदि बच्चों में किसी सिरप के सेवन के बाद उल्टी, दस्त, बेहोशी या पेशाब में कमी जैसे लक्षण दिखें, तो तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।
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इस घटना ने एक बार फिर दवाओं की गुणवत्ता और सरकारी निगरानी पर गंभीर सवाल खड़े किए हैं। ऐसे समय में जब भारत फार्मा हब बनने की दिशा में अग्रसर है, इस तरह की घटनाएं अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश की छवि को नुकसान पहुंचा सकती हैं। WHO की चेतावनी के बाद अब जरूरी है कि केंद्र और राज्य सरकारें मिलकर सख्त कदम उठाएं और दोषियों को कठोर सजा दिलाएं।









