इसके बाद माता-पिता ने सेक्टर 142 पुलिस स्टेशन में शिकायत दर्ज कराई और एफआईआर दर्ज हुई। उनका आरोप है कि घटना के दौरान डे-केयर की मालकिन ने कोई हस्तक्षेप नहीं किया, बल्कि उन्होंने और परिचारिका ने उल्टा उन्हें गालियां दीं और धमकाया।
पुलिस ने बताया कि बच्ची का मेडिकल परीक्षण हो चुका है और परिचारिका को गिरफ्तार कर लिया गया है। मामले की आगे जांच जारी है।
बच्ची के पिता संदीप ने बताया कि, हमने 21 मई से बच्ची को डे-केयर भेजना शुरू किया था। सोमवार (4 अगस्त) को हमने बेटी की जांघों पर निशान देखे। संक्रमण के डर से डॉक्टर के पास गए, जिन्होंने बताया कि यह काटने के निशान हैं। इसके बाद हमने सीसीटीवी फुटेज देखा और सच्चाई सामने आई। फिर हम पुलिस के पास गए।
हम रोज़ाना सिर्फ दो घंटे के लिए बच्ची को डे-केयर में छोड़ते थे। हमें कहा गया था कि तीन टीचर हैं जो बच्चों को संभालेंगे, लेकिन हमें पता चला कि बच्ची परिचारिका के पास थी। डे-केयर की मालकिन हमेशा कहती थी, ‘आपका बच्चा यहां बहुत खुश है।’ हम दो घंटे के लिए 2,500 रुपये दे रहे थे।
कॉम्प्लेक्स में एक और परिवार ने भी बताया कि उनके बच्चे के साथ भी इसी तरह की घटना हुई है और वे भी जल्द पुलिस में शिकायत दर्ज कराएंगे।
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आगे उन्होंने कहा- मैं चाहता हूं कि डे-केयर की मालकिन और परिचारिका के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो ताकि किसी और बच्चे के साथ ऐसा न हो। ये दिन बहुत कठिन थे। मैं काम पर नहीं जा पाया, पत्नी रातभर सो नहीं पाई,’
संदीप ने बताया कि जिसने उनकी बच्ची को मारा वह परिचारिका नाबालिग है। अधिकारियों को यह सुनिश्चित करना चाहिए कि वे ऐसे संवेदनशील काम के लिए केवल परिपक्व और धैर्यवान लोगों को ही नियुक्त करें।
पुलिस यह भी जांच कर रही है कि चारू नाम की महिला द्वारा संचालित यह डे-केयर नाबालिग को इतनी संवेदनशील जिम्मेदारी कैसे दे सकता है। साथ ही डे-केयर का लाइसेंस भी जांचा जा रहा है और गड़बड़ी मिलने पर कार्रवाई की जाएगी।









